March 21
सफलता के लिये चुने सही राह
अकसर सही और गलत का मासला हम नैतिक या धार्मिक द्ष्टिकोण से देखते है, पंरतु जीवन में यह जरूरी है कि हम इसके व्यवहारिक पहलू पर नजर डाले | जब आप कोई ऐसा काम करते है, जो आपकी अंतरआत्मा के खिलाफ होता है,तो आपके भितर ऐक तरह का अपराध बोध आ जाता है और इस अपराधबोध के कारण आपकी सोचने की थमता खत्म हो जाती है | क्यों कि आपका दिमाग लगातार यही सवाल पूछता रहता है कि कही मैं पकडा तो नही जाऊंगा |
जीवन में बहुत सारे ऐसे मौके आऐगे जब सफलत हासिल करने के लिये आपके सामने गलत काम करने का प्रलोभन मौजूद होगा |मिसाल के तौर पर किसी दिन आप अपने समान को बेचने की व्यग्रता में ग्राहक को जानबुझकर गलत जानकारी देकर उसे खरीदने को मजबूर कर देंगे |ऐसा करने आपको सफलता मिल जाती है, परंतु उससे आपका अपराधबोध आप पर हावी हो जावेगा और अगली बार आप अपने उस ग्राहक को देखकर परेशान हो जाऐगे | आप सोचने लगेंगे, क्या उसे पता चल गया है कि मैने उसे धोखा दिया था | ? आप प्रस्तुति भी पूरे मन से नही दे पाऐगे | लंबे समय में इस तरह की गलत सेल्स तकनीकें आपकी अंतरआत्मा को चोट पहु्ँचायेगी हीं, आपकी आमदनी को भी कम कर देंगी |
हममें से हर किसी की सही होने , सही सोचने ओर सही काम करने की इच्छा होती है |जब हम इस इच्छा के विपरीत व्यवहार करते है तो अपनी अ्तर आत्मा को ऐसे कैंसर से ग्रसित कर लेते है जो लगातार बढता जाता है |इससे हमारे आत्मविश्वास में कमी आने लगती है| जीवन में धोखा देकर अपना आत्मविश्वास कम करके सफल होने की कोशिश कभी न करें |
आखिर क्यों
१ सवाल....यदि भगवान सर्वव्यापीहैतो इतने सारे मंदिर क्यों ?
जबाब........सर,हवा भी सब जगह है ,लेकिन हमें इसे महसूस करने के लिये पंखे की जरूरत पडती है|
२ सवाल.....गुलामनबी आजाद और प्रकाशसिहं बादल के नाम मेंक्या अजीब है |
जबाब.........इनके नामों का पहला शब्द आखिरी शब्द का विरोधाभासी हैं |
February 16
व्यक्ति का आईना है उसका व्यतित्व
व्यक्तित्व ही व्यक्तिका वास्तविक परिचय है | समृद्ध ऍवं श्रेष्ठ व्यकतित्व उसकी पूंजी ऐवं संपदाहोती है और यह संपदा दैनिक जीवन में व्यवहार में आने वाले छोटे छोटे सू़ञो के माघ्यम से जमा होती है| जिसके पास यह जमा पूंजी जितनी अघिक होगी,वह ऊतना ही व्यवहार कुशल व सफल व्यक्तित्व का घनी होगा |इसके अभाव में व्यक्ति व्यावहारिक धरातल पर नितांत दरिद्रहोता है ,भले ही वह अन्य झेञो में कितना ही समृद्घ क्यों न हो |इसी को आज व्यवहारिक बैंक खाते के रूप में जाना जाता है, जो अत्यंत लोकप्रिय है |यह हर उम्र के लोगों के लिये ऍक समान लागू होता है, क्यों कि सभी का बाह्य जीवन व्यवहारिक पृष्ठभूमि में पलता बढता,विकसित होता ाहै| इसी में आंतरिक जीवन के बंद कपाट खुलते है|प्रसिद्ध लेखक स्टीफन ने अपनी किताब "दि सेवेन हैबिट्स आँफ हाईली इफेक्टिव टीन्स" मेंजीवन के लिये छह बिंन्दुऔका उल्लेख किया है |यदि इसे दैनिक दिन चर्या में उतारा जा सके तो जीवन सफलता व सम्रद्घि की आोर ाग्रसर होने लगता है | ये सूञ ही जमा पूंजी है |ये हे ः
१ अपने वचन की रझा करना ,
२ हर दिन कोई अच्छा कार्य करने का प्रयास करना,
३ विश्वसनीय होना
४ दूसरो की सुनना,
५ गलतियों के लिये विनम्रतापूर्वक झमा मांगना,
६ और उचित की इच्छा करना |
ये सूञ जब व्यवहार और आचरण में उतरने लगते है तौ व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार आने लगता है |